किसी परिकल्पना (हाइपोथेसिस) की जाँच करने के लिये, उसको असिद्ध करने के लिये, या स्थापित करने के लिये अपनायी गयी विधि को ही प्रयोग कहते हैं। प्रयोग में विधि के साथ साथ कुछ वस्तुएँ और उपकरण (विशेष रूप से, मापन के लिये आवश्यक उपकरण) होते हैं।

  • सामान्यतः किसी नये नियम की खोज के लिये हम यह रीति अपनाते हैं- पहले हम अनुमान (guess) करते हैं। उसके बाद हम गणना करके देखते हैं कि यदि ये अनुमान सही निकले तो क्या होगा अर्थात यदि यह नियम सही सिद्ध हुआ तो इसके क्या-क्या परिणाम हो सकते हैं। इसके बद हम गणना से प्राप्त परिणामों और प्रकृति से प्रप्त आंकडों की तुलना करते हैं और देखते हैं कि वे मिल्ते-जुलते हैं या नहीं। यदि यह प्रयोग से मेल नहीं खाता तो यह गलत है। उस सरल कथन में ही विज्ञान की कुंजी छिपी है। इससे कोई अन्तर नहीं पड़त कि आपका अनुमन कितना सही है, किसने अनुमान लगाया, या उसका नाम क्या है। यदि यह (अनुमान) प्रयोग से सहमत नहीं है तो यह गलत है। -- रिचर्ड फीनमान (Richard Feynman)

इन्हें भी देखेंसंपादित करें