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सुभाष चन्द्र बोस

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नेता, आज़ाद हिंद फौज के संस्थापक
तुम मुझे खून दो और मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा।

सुभाष चन्द्र बोस (२३ जनवरी १८९७ - अज्ञात या 18 अगस्त 1945) एक भारतीय स्वतन्त्रता सेनानी थे, जिनका विश्वास था कि ब्रिटिश शासन के विरुद्ध हिन्सात्मक विरोध सही है। इन्होनें विख्यात इंडियन नेशनल आर्मी (आजाद हिन्द फौज) की स्थापना की थी।

उद्धरणसंपादित करें

  • तुम मुझे खून दो और मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा।
  • जब हम खड़े हों, तब आज़ाद हिन्द फौज को एक ग्रेनाइट की दीवार के समान होना होगा; जब हम आगे बढ़ें, तब आज़ाद हिन्द फौज को एक स्ट्रीमरोलर के समान होना होगा।
  • जय हिन्द।
  • दिल्ली चलो।
  • याद रहिये सबसे बड़ा अपराध अन्याय सहना और गलत के साथ समजोता कारना हैं ।
  • एक सच्चे सेनिक को सेन्य और अध्यात्मिक दोनों प्रशिक्षण की जरुरत होती हैं ।
  • इतिहास में कभी भी विचार-विमर्श से कोई ठोस परवर्तन नहीं हासिल किया गया हैं ।
  • राष्ट्रवाद मानव जाती के उच्चतम आदर्शो सत्यम, शिवम्, सुन्दरम् से प्रेरित हैं।
  • मेरे मन में कोई संदेह नहीं है कि हमारे देश की प्रमुख समस्याएं गरीबी,अशिक्षा, बीमारी, कुशल उत्पादन एवं वितरण सिर्फ समाजवादी तरीके से ही की जा सकती है।
  • किसी एक विचार के लिए यदि कोई मारता है तो वह विचार उसके मरने के बाद भी हजारों लोगों में जीवित रहती है।
  • आज हमारे अन्दर बस एक ही इच्छा होनी चाहिए, मरने की इच्छा ताकि भारत जी सके! एक शहीद की मौत मरने की इच्छा ताकि स्वतंत्रता का मार्ग शहीदों के खून से प्रशस्त हो सके.
  • एक सच्चे सैनिक को सैन्य और आध्यात्मिक दोनों ही प्रशिक्षण की ज़रुरत होती है।

बाह्य सूत्रसंपादित करें