"तुलसीदास" के अवतरणों में अंतर

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[[चित्र:Gosvami Tulsidas II.jpg।thumb।right।200px।तुलसीदासjpg|thumb|right|200px|तुलसीदास ]]
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल वाल्मीकीय रामायण को आर्य काव्य का आदर्श मानते हैं। ’मानस‘ में तुलसीदास धर्मोपदेष्टा और नीतिकार के रूप में सामने आते हैं। वह ग्रंथ एक धर्मग्रंथ के रूप में भी लिखा गया है।
 
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