"भीमराव आम्बेडकर" के अवतरणों में अंतर

सुधार किए
(सुधार किए)
टैग: मोबाइल संपादन मोबाइल वेब सम्पादन
 
 
 
* जीवन लम्बा होने की बजाय महान होना चाहिए।
* हर व्यक्ति जो मिल का सिद्धांत जानता हो कि एक देश दूसरे देश पर राज करने में फिट नहीं है, उसे ये भी स्वीकार करना चाहिये कि एक वर्ग दुसरे वर्ग पर राज करने में फिट नहीं है।
* उदासीनता लोगों को प्रभावित करने वाली सबसे खराब किस्म की बीमारी है।
* समानता एक कल्पना हो सकती है, लेकिन फिर भी इसे एक गवर्निंग सिद्धांत रूप में स्वीकार करना होगा।
* एक सुरक्षित सेना एक सुरक्षित सीमा से बेहतर है।
* लोग और उनके धर्म; सामाजिक नैतिकता के आधार पर सामाजिक मानकों द्वारा परखे जाने चाहिए.चाहिए। अगर धर्म को लोगों के भले के लिये आवश्यक वस्तु मान लिया जायेगा तो और किसी मानक का मतलब नहीं होगा।
* बुद्धि का विकास मानव के अस्तित्व का अंतिम लक्ष्य होना चाहिए।
* मैं ऐसे धर्म को मानता हूँ जो स्वतंत्रता, समानता, और भाई -चारा सीखाये।
* यह ज़रूरी है कि हम अपना दृष्टिकोण और ह्रदयहृदय जितना सभव हो अच्छा करें.करें। इसी से हमारे और अन्य लोगों के जीवन में, अल्पकाल और दीर्घकाल दोनों में ही खुशियाँ आयंगी।
* मैं एक समुदाय की प्रगति का माप महिलाओं द्वारा हासिल प्रगति की डिग्री द्वारा करता हूँ।
* एक महान व्यक्ति एक प्रख्यात व्यक्ति से एक ही बिंदु पर भिन्न हैं कि, महान व्यक्ति समाज का सेवक बनने के लिए तत्पर रहता हैं।
* मनुष्य नश्वर हैं। ऐसे विचार भी होते हैं। एक विचार को प्रचार-प्रसार की जरूरत है जैसे एक पौधे में पानी की जरूरत की जरूरत होती है। अन्यथा दोनों मुरझा जायेंगे और मर जायेंगे।
* इतिहास बताता है कि जहाँ नैतिकता और अर्थशाश्त्र अर्थशास्त्र के बीच संघर्ष होता है वहां जीत हमेशा अर्थशाश्त्र अर्थशास्त्र की होती है। है . निहित स्वार्थों को तब तक स्वेच्छा से नहीं छोड़ा गया है जब तक कि मजबूर करने के लिए पर्याप्त बल ना लगाया गया हो।
* निहित स्वार्थों को तब तक स्वेच्छा से नहीं छोड़ा गया है जब तक कि मजबूर करने के लिए पर्याप्त बल ना लगाया गया हो।
* एक सफल क्रांति के लिए सिर्फ असंतोष का होना काफी नहीं है। जिसकी आवश्यकता है वो है राजनीतिक और सामाजिक अधिकारों के महत्व, जरुरत व न्याय में पूर्णतया गहराई से दोष।
* जब तक आप सामाजिक स्वतंत्रता नहीं हासिल कर लेते, कानून आपको जो भी स्वतंत्रता देता है वो आपके लिये बेमानी है।
----
 
 
* मैं ऐसे धर्म को मानता हूँ जो स्वतंत्रता, समानता, और भाई-चारा सिखाये।
 
* हम आदि से अन्त तक भारतीय हैं।
* सागर में मिलकर अपनी पहचान खो देने वाली पानी की एक बूँद के विपरीत, इंसान जिस समाज में रहता है वहां अपनी पहचान नहीं खोता। इंसान का जीवन स्वतंत्र है। वो सिर्फ समाज के विकास के लिए नहीं पैदा हुआ है, बल्कि स्वयं के विकास के लिए पैदा हुआ है।
 
* पति-पत्नी के बीच का सम्बन्ध घनिष्ट मित्रों के सम्बन्ध के सामानसमान होना चाहिए।
 
* जीवन लम्बा होने की बजाये महान होना चाहिए।
१०

सम्पादन