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<div style="padding-top: 0.4em; padding-bottom: 0.3em;"><table border=0 align="center" cellpadding="0" cellspacing="0">
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<div style="background: #ffffff; padding-top: 0.1em; padding-bottom: 0.1em; text-align: center; font-size: larger; width: 100%"> इहैव तैर्जितः सर्गो येषां साम्ये स्थितं मनः। निर्दोषं हि समं ब्रह्म तस्माद्ब्रह्मणि ते स्थिता:॥५-१९॥ -- अर्थात् जिनका मन सम भाव में स्थित है, उनके द्वारा यहां संसार में ही लय (मुक्ति) को प्राप्त कर लिया गया हैं, क्योंकि ब्रह्म निर्दोष और सम है, इसलिए वे ब्रह्म में स्थित हैं॥19॥ - [[श्रीमद्भगवद्गीता]] </div></td>
<div style="background: #ffffff; padding-top: 0.1em; padding-bottom: 0.1em; text-align: center; font-size: larger; width: 100%"> सर्प, शेर, डंक मारने वाले प्राणी, छोटे बच्चे, दूसरों के कुत्तों, और मूर्ख मनुष्य: इन सभी को नीद से नहीं उठाना चाहिए - [[चाणक्य]] </div></td>
 
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