• न हि कश्चिद् आचारः सर्वहितः संप्रवर्तते । -- महाभारत
ऐसा कोई भी नियम नहीं हो सकता जो सभी के लिए हितकर हो
  • अपवाद के बिना कोई भी नियम लाभकर नहीं होता। -- थामस फुलर
  • थोडा-बहुत अन्याय किये बिना कोई भी महान कार्य नहीं किया जा सकता। -- लुइस दी उलोआ
  • लोकतंत्र – जहाँ धनवान, नियम पर शाशन करते हैं और नियम, निर्धनों पर
  • सभी वास्तविक राज्य भ्रष्ट होते हैं। अच्छे लोगों को चाहिये कि नियमों का पालन बहुत कड़ाई से न करें। -- इमर्शन
  • न राज्यं न च राजासीत् न दण्डो न च दाण्डिकः ।
स्वयमेव प्रजाः सर्वा रक्षन्ति स्म परस्परम् ॥
( न राज्य था और ना राजा था , न दण्ड था और न दण्ड देने वाला ।स्वयं सारी प्रजा ही एक-दूसरे की रक्षा करती थी । )
  • कानून चाहे कितना ही आदरणीय क्यों न हो, वह गोल को चौकोर नहीं कह सकता। -- फिदेल कास्त्रो

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