माओ त्से तुंग

पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के संस्थापक पिता

माओ त्से तुंग (), चीनी क्रान्तिकारी, राजनैतिक विचारक और साम्यवादी दल के सबसे बड़े नेता थे जिनके नेतृत्व में चीन की क्रान्ति सफल हुई। उन्होंने जनवादी गणतन्त्र चीन की स्थापना (सन् 1949) से मृत्यु पर्यन्त (सन् 1973) तक चीन का नेतृत्व किया। मार्क्सवादी-लेनिनवादी विचारधारा को सैनिक रणनीति में जोड़कर उन्होंने जिस सिद्धान्त को जन्म दिया उसे माओवाद नाम से जाना जाता है। कई लोग माओ को एक विवादास्पद व्यक्ति मानते हैं परन्तु चीन में वे राजकीय रुप में महान क्रान्तिकारी, राजनैतिक रणनीतिकार, सैनिक पुरोधा एवं देशरक्षक माने जाते हैं। चीनियों के अनुसार माओ ने अपनी नीति और कार्यक्रमों के माध्यम से आर्थिक, तकनीकी एवं सांस्कृतिक विकास के साथ देश को विश्व में प्रमुख शक्ति के रुप में ला खडा करने में मुख्य भूमिका निभाई।

विचारसंपादित करें

  • साम्यवाद इश्क नहीं है। साम्यवाद एक हथौड़े के समान है, जो शत्रुओं को कुचलने के काम आता है।
  • अपनी सोच को सीमित मत करो, तभी विस्तार में सोच पाओगे।
  • अपने शत्रु को कभी भी कमजोर मत समझो।
  • आपदा और अराजकता हमेशा अच्छी होती है।
  • एक बच्चे को एक मछली न दें, बल्कि उसे यह सिखाएं कि मछली कैसे पकड़ते हैं।
  • कठिन समय में हमें अपनी सफलताओं को याद करना चाहि
  • किसी भी काम का बार-बार अभ्यास हमें उस काम में सक्षम बना देता है।
  • क्रांति बगावत है, जिसके द्वारा एक सत्ता दूसरे का तख्ता पलट करती है।
  • दूसरे विश्वयुद्ध को देखो, हिटलर की क्रूरता को। जितनी क्रूरता होगी, क्रांति में उतना ही उत्साह होगा।
  • नैतिकता बंदूक की नोंक पर आती है।
  • पहले खुद सीखें, फिर आप दूसरों को शिक्षा दें।
  • मनुष्य को अवश्य ही, प्रकृति को जीतना चाहिए।
  • मृत्यु के अनेक लाभ हैं, यह धरती को उपजाऊ बनाता है।
  • राजनीति बिना खून की लड़ाई है, जब कि युद्ध खून से भरपूर राजनीति है।
  • राजनीति सारे आर्थिक कामों की रीढ़ है।
  • लोग और केवल लोग ही वह शक्ति हैं, जो विश्व में इतिहास बनाते हैं।
  • लोग पानी की तरह होते हैं, और सेना मछली की तरह।
  • शक्ति बंदूक की नली से आती है। जिसके पास बंदूक है, उसी के पास शक्ति है। जिसके पास शक्ति होती है, वह तानाशाही करता है। चाहे सरकार का स्वरुप कुछ भी हो।
  • संघर्ष के बाद ही विश्व में चमत्कार मुमकिन होते हैं।
  • सबसे महत्त्वपूर्ण बात है , मजबूत बनना। मजबूत होकर हम दूसरों को जीत सकते हैं। दूसरों को जीतना एक गुण है।
  • सभी राजनैतिक शक्ति बंदूक की गोली से निकलती है।
  • समाजवाद की घास, पूंजीवाद की फसल से बेहतर है।
  • सही राजनीतिक दृष्टिकोण नहीं होना, आत्मा नहीं होने जैसा है।
  • सेना को चाहिए कि वह जनता के साथ एक रूप हो, ताकि जनता उसे अपनी ही सेना समझे, ऐसी सेना अपराजेय बन जाएगी।
  • स्टालिन ने गलतियां की। उसने हमें लेकर गलतियां की, 1927 में। उसने योगोस्वालव को लेकर भी गलतियां की। गलतियां किए बिना कोई आगे नहीं बढ़ सकता। गलतियां करना जरूरी है। पार्टी गलती किए बिना आगे नहीं बढ़ सकती। यह बड़ी बात है।
  • हम मार्क्स, एंगल्स, लेनिन और स्टालिन के आभारी हैं कि उन्होंने हमें हथियार दिया। ये हथियार मशीन गन नहीं है। यह मार्क्सवाद – लेनिनवाद है।
  • हमारा लक्ष्य अपने शत्रुओं को अपना मित्र बनाना होना चाहिए।
  • हमें अपनी लड़ाई हमेशा साहस के साथ लड़नी चाहिए।
  • हमें उन सभी बातों का समर्थन करना चाहिए जिसका हमारे दुश्मन विरोध करते हैं। उन सभी बातों का विरोध करना चाहिए, जिसका हमारे दुश्मन समर्थन करते हैं।
  • हर सुधार विरोधी व्यक्ति कागज के शेर की तरह होता है।