महावतार बाबाजी, योगीराज लाहिड़ी महाशय द्वारा एक भारतीय योगी को दिया गया नाम है, और उनके कई शिष्य हैं, जिन्होंने 1861, 1935 और 1980 के बीच उनसे मिलने की सूचना दी थी।

महावतार बाबाजी

उद्धरणसंपादित करें

  • अनेकों के दोष के कारण सभी को दोषी मत मानो। इस जगत् में हर चीज़ मिश्रित रूप में है, शक्कर और रेत के मिश्रण की तरह। चींटी की भाँति बुद्धिमान बनो, जो केवल शक्कर के कणों को चुन लेती है और रेत-कणों को स्पर्श किये बिना छोड़ देती है।
  • बहुत ही थोड़े मर्त्य मानवों को यह ज्ञात है कि ईश्वर के राज्य में ऐहिक परिपूर्तियाँ भी सम्मिलित हैं, दैवी जगत् की सत्ता इहलोक में भी चलती है, परन्तु इहलोक का स्वरूप ही भ्रमात्मक होने के कारण उसमें सत्य के दैवी तत्त्व का अभाव है।
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