• आहारनिद्राभयमैथुनं च सामान्यमेतत् पशुभिर्नराणाम्।
धर्मो हि तेषां अधिकोविशेषो धर्मेण हीनाः पशुभिः समानाः॥ -- महाभारत, शान्तिपर्व
भोजन, नींद, डर और वासना, पशु और आदमी दोनों में सामान्य है। आदमी का विशेष गुण धर्म है; धर्म के बिना वह एक पशु के समान है।
  • अर्थातुराणां न सुहृन्न बन्धुः कामातुराणां न भयं न लज्जा।
चिन्तातुराणां न सुखं न निद्रा क्षुधातुराणां न बलं न तेजः॥ -- गरुडपुराण
अर्थातुर के न मित्र होते हैं न बन्धु ; कामातुर को भय और लज्जा नहीं होती। चिन्ताग्रस्त को सुख व निद्रा नहीं होते; भूख से पीड़ित को न बल होता है न तेज।