• कामं क्रोधं च लोभं च दम्भं दर्पं च भूमिपः ।
सम्यग्विजेतुं यो वेद स महीमभिजायते ॥ -- महासुभषितसंग्रह (९५३०)
भावार्थ - जो राजा काम, क्रोध, लोभ, दम्भ , दर्प (घमण्ड ) इन सभी दुर्गुणों पर पूर्ण रूप से विजय प्राप्त कर लेता है, वही इस पृथ्वी पर अधिकारपूर्वक शासन करने में समर्थ होता है।
  • कार्पण्येन यशः क्रुधा गुणचयो दम्भेन सत्यं
क्षुधां मर्यादा व्यसनैर्धनं च विपदा स्थैर्यं प्रमादैर्द्विजः।
पैशुन्येन कुलं मदेन विनयो दुश्चेष्ठया पौरुषं
दारिद्र्येण जनादरो ममतया चात्मप्रकाशो हतः॥ -- महासुभषितसंग्रह (९७२२)
कंजूसी के कारण यश का, क्रोध के कारण गुणों का, दम्भ के कारण सत्य का, भूख के कारण मर्यादा का, व्यसनों के कारण धन का , विपत्ति के कारण धैर्य का, मद्य पान तथा उपेक्षा के कारण द्विजों का, दुष्ट प्रवृत्ति के सदस्यों के कारण सम्मानित कुलों का, घमण्ड के कारण विनम्रता का, दुर्व्यवहार के कारण पौरुष का, दरिद्रता के कारण समाज में आदर का, तथा सांसारिक क्रियाकलापों के प्रति ममत्व के कारण मनुष्य की अन्तरात्मा के प्रकाश का नाश हो जाता है।
  • अज्ञः सुखं आराध्यः सुखतरं आराध्यते विशेषज्ञः।
ज्ञानलवदुर्विदग्धं ब्रह्मापि नरं न रंजयति॥
अज्ञानी को को आसानी के साथ सिखाया तथा समझाया जा सकता है और उससे भी अधिक आसानी के साथ पूर्ण ज्ञान रखने वाले को सिखाया तथा समझाया जा सकता है किन्तु ज्ञानी होने का दम्भ रखने वाले अल्पज्ञानी को ब्रह्मा भी सिखा तथा समझा नहीं सकते।
  • बिरति बिबेक बिनय बिग्याना। बोध जथारथ बेद पुराना॥
दंभ मान मद करहिं न काऊ। भूलि न देहिं कुमारग पाऊ॥ -- रामचरितमानस (सन्तों के लक्षण)
भावार्थ:- तथा वैराग्य, विवेक, विनय, विज्ञान (परमात्मा के तत्व का ज्ञान) और वेद-पुराण का यथार्थ ज्ञान रहता है। वे दम्भ, अभिमान और मद कभी नहीं करते और भूलकर भी कुमार्ग पर पैर नहीं रखते॥
  • कलिमल ग्रसे धर्म सब लुप्त भए सदग्रंथ।
दंभिन्ह निज मति कल्पि करि प्रगट किए बहु पंथ॥ -- रामचरितमानस (कलियुग वर्णन)
कलियुग के पापों ने सब धर्मों को ग्रस लिया, सद्ग्रन्थ लुप्त हो गए, दंभियों ने अपनी बुद्धि से कल्पना कर-करके बहुत-से पंथ प्रकट कर दिए॥
  • मारग सोइ जा कहुँ जोइ भावा। पंडित सोइ जो गाल बजावा॥
मिथ्यारंभ दंभ रत जोई। ता कहुँ संत कहइ सब कोई॥ -- रामचरितमानस (कलियुग वर्णन)
जिसको जो अच्छा लग जाए, वही मार्ग है। जो डींग मारता है, वही पंडित है। जो मिथ्या आरम्भ करता (आडंबर रचता) है और जो दंभ में रत है, उसी को सब कोई संत कहते हैं।
  • दम्भ का हमारे स्वभाव से वैसा ही सम्बन्ध है जैसा कि रंग का सौंदर्य से, यह न केवल अनावश्यक है, लेकिन, यह हममें हो रहे सुधार को भी क्षीण कर देता है। -- अलेक्जैण्डर पोप
  • पुरुष जिनका यह दावा है कि तु है,
बहादुर और स्वतन्त्र वयस्क पिता की संतान,
यदि पृथ्वी पर एक भी गुलाम साँस ले रहा है,
तो क्या आप सही मायने में स्वतंत्र और बहादुर हैं? -- जेम्स रसेल कोवेल
  • मेरे सभी शो महान हैं। उनमें से कुछ खराब भी हैं, लेकिन वे सभी महान हैं। -- ल्यू ग्रेड
  • अमेरिका के सीमा शुल्क काउंटर पर कहा – “मेरे पास मेरी प्रतिभा के अलावा घोषणा करने के लिए कुछ भी नहीं है।” -- ऑस्कर वाइल्ड
  • अपने कुल चिन्ह के बारे में डींग और शक्ति का प्रदर्शन और समग्र सौन्दर्य, सारा प्राप्त किया हुआ धन, अपरिहार्य घंटे की तरह इंतजार करता है। महिमामंडित मार्ग जाते तो हैं लेकिन कब्र की ओर। -- थॉमस ग्रे
  • मनुष्य अपने सभी विचारों को सिद्धान्तों के रूप में लेता है। -- हर्बर्ट अगर
  • एक अभिमानी आदमी से कौन घृणा नहीं करता है। -- यूरीपिडेस
  • जब लोग अचानक समृद्ध हो जाते हैं, वे निरर्थक भी हो जाते हैं। -- लारेंस जे पीटर
  • मेरी अपनी हड्डियों से चिपकने वाले वसा की तुलना में कोई मीठा वसा नहीं मिला। -- वॉल्ट व्हिटमॅन
  • एक व्यक्ति जितना ज्यादा अपने बारे में बोलता है, उसे दूसरे के बारे में सुनने में उतनी ही कम दिलचस्पी होती है। -- जोहान कास्पर लावाटर
  • मैं केवल भगवान और इतिहास के प्रति जिम्मेदार हूँ। -- जी एफ फ्रेंको बाहामोंडे
  • दम्भ सबसे कमजोर शरीर का सबसे मजबूत कार्य है। -- विलियम शेक्सपियर
  • वह उस मुरगे की तरह था, जिसने सोचा कि सूरज उसके बांग देने के कारण ही निकला। -- जॉर्ज इलियट
  • दम्भ अपनी बुद्धि की तुलना में अधिक बात करता है। -- डुक डे ला रोचेफौकाउल्ड
  • मेरी विशेषता है कि जब अन्य लोग गलत होते हैं तो मैं सही होता हूँ। -- जॉर्ज बर्नार्ड शॉ
  • अगर मैं सृष्टि के निर्माण के समय उपस्थित होता तो ब्रह्मांड के बेहतर क्रम के लिए कुछ उपयोगी संकेत दिया होता। -- स्पेन के राजा अलफोंसो
  • मैं अविश्वसनीय रूप से उत्सुक हूँ कि आप जो इतिहास लिख रहे हैं उसमें मेरा नाम और मेरी बार–बार प्रशंसा प्रमुखता से दिया जाना चाहिए। -- मारकस टुल्लीअस सिसरो
  • मैंने इतना सही और ईमानदारी से लिखा है कि मेरे सम्पूर्ण योगदान के बारे में भविष्य के छात्र विचार करेंगे। -- जॉन ओ ‘हारा
  • जब भगवान ने आदमी का आविष्कार किया तो वह उसे मेरे जैसा देखना चाहता था। -- ब्रायन ओल्डफील्ड
  • एक ईश्वर नहीं हो सकता क्योंकि अगर वह एक होता तो मुझे विश्वास नहीं होता कि वह मैं नहीं हूँ। -- फ्रेडरिक नीत्शे
  • वाहवाही की भूख सभी चेतन साहित्य और वीरता का स्रोत है। -- डुक डे ला रोचे फौकाउल्ड
  • कोई भी मेरे साथ बहस क्यों नहीं करना चाहता है? यह इसलिए क्योंकि मैं हमेशा सही होता हूँ । -- जिम बोउसन
  • सभी भ्रमों में यह एक जिज्ञासु तथ्य है। आक्रांत मानव जाति में, कोई भी इतना जिज्ञासु नहीं जितना कि हमलोग हैं, मानसिक और नैतिक रूप से उनसे ज्यादा योग्य जो हमसे अलग विचार रखते हैं। -- एल्बर्ट हब्बार्ड
  • आम तौर पर लोग दूसरों के द्वारा खोजे गए कारणों के अपेक्षा अपने द्वारा खोजे गए कारणों से ज्यादा आश्वस्त होते हैं। -- ब्लेज़ पास्कल
  • हमें ईश्वर से अधिक महान होना चाहिए, क्योंकि हमें उसके अन्याय को पूर्ववत रखना है। -- जूल्स रेनार्ड
  • लोगों को लगता है कि वे पैसे के बिना खुश रह सकते हैं, यह एक प्रकार का आध्यात्मिक दम्भ है। -- अल्बर्ट कामू