एनी बेसेन्ट

ब्रिटिश समाजवादी, थियोसोफिस्ट, महिला अधिकार कार्यकर्ता, लेखक और व्याख्याता

श्रीमती एनी बेसेंट, आयरलैंड में जन्मी एक भारतप्रेमी महिला थीं जिन्होने भारत की स्वतंत्रता एवं भारतवासियों के सामाजिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक उत्थान के लिए अनेक प्रयास किए। वे थियोसोफिकल सोसायटी से जुड़ी हुईं थीं।

विचारसंपादित करें

  • पूर्व जन्म में मैं हिन्दू थी।
  • हिन्दू धर्म विश्व में सबसे प्राचीन ही नहीं, सबसे श्रेष्ठ भी है।
  • भारत एक ऐसा देश है जिसमें हर महान धर्म के लिए जगह है।
  • भारत और हिन्दुत्व एक-दूसरे के पर्याय हैं। भारत और हिन्दुत्व की रक्षा भारतवासी और हिन्दू ही कर सकते हैं। हम बाहरी लोग आपकी चाहे जितनी प्रशंसा करें, किन्तु आपका उद्धार आपके ही हाथ है।
  • आप किसी प्रकार के भ्रम में न रहें। हिन्दुत्व के बिना भारत के सामने कोई भविष्य नहीं है। हिन्दुत्व ही वह मिट्टी है, जिसमें भारतवर्ष का मूल गडा हुआ है। यदि यह मिट्टी दृढ हटा ली गयी तो भारतवासी वृक्ष सूख जायेगा।
  • भारत में प्रश्रय पाने वाले अनेक धर्म हैं, अनेक जातियां हैं, किन्तु इनमें किसी की भी शिरा भारत के अतीत तक नहीं पहुंची है, इनमें से किसी में भी वह दम नहीं है कि भारत को एक राष्ट्र में जीवित रख सकें, इनमें से प्रत्येक भारत से विलीन हो जाय, तब भी भारत, भारत ही रहेगा। किन्तु, यदि हिंदुत्व विलीन हो गया तो शेष क्या रहेगा। तब शायद, इतना याद रह जायेगा कि भारत नामक कभी कोई भौगोलिक देश था।
  • भारत के इतिहास को देखिए, उसके साहित्य, कला और स्मारकों को देखिए, सब पर हिन्दुत्व, स्पष्ट रूप से, खुदा हुआ है।
  • चालीस वर्षों के सुगम्भीर चिन्तन के बाद मैं यह कह रही हूँ कि विश्व के सभी धर्मों में हिन्दू धर्म से बढ़ कर पूर्ण, वैज्ञानिक, दर्शनयुक्त एवं आध्यात्मिकता से परिपूर्ण धर्म दूसरा और कोई नहीं है।
  • भारत की ग्रामीण व्यवस्था को छिन्न भिन्न करना इंग्लैंड की सबसे बड़ी गलती थी।
  • समाजवाद आदर्श राज्य है, लेकिन इसे तबतक हासिल नहीं किया जा सकता, जबतक मनुष्य स्वार्थी है।